
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
रोग-दोष जाके निकट न झाँके ॥
संतन के प्रभु सदा सहाई ॥
लंका जारि सिया सुधि लाये ॥
जात पवनसुत बार न लाई ॥
सियाराम जी के काज सँवारे ॥
लाये संजिवन प्राण उबारे ॥
अहिरावण की भुजा उखारे ॥
दाहिने भुजा संतजन तारे ॥
जय जय जय हनुमान उचारें ॥
आरती करत अंजना माई ॥
बसहिं बैकुंठ परम पद पावे ॥
तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ॥
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
संदर्भ (Trusted Sources)
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